बीच भँवर में नइया डग मग, डग मग गोते खाए

बीच भँवर में नइया डग मग, डग मग गोते खाए,
मन अशांत, चित विचलित किनारा नजर ना आए
विश्वास का तिनका थामे हाथ में समय गुजरता जाए
(मनोज कुमार विट्ठल)

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