हम देखेंगे........., हम देखेंगे..........
ठंडे खून को बनते लावा, हम देखेंगे
हम देखेंगे........., हम देखेंगे..........
हँसती आँखों में खून के आँसू, हम देखेंगे
हम देखेंगे........., हम देखेंगे..........
बंटे टुकड़ों को बनते सैलाब, हम देखेंगे
हम देखेंगे........., हम देखेंगे..........
दबी चीखों को मिलते इंसाफ़, हम देखेंगे
(मनोज कुमार विट्ठल)
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