मैं अब
ना पीछे हटूंगा !
ना डिगा हूँ, ना डिगूंगा, ना ही डिगने
दूंगा
गिर गिर के उठा हूँ, उठ उठ के बना हूँ,
अब ना पीछे हटूंगा,
मन में ठानी, रब की मेहरबानी, कई संबल
दिये मुझे रब ने,
जब उसकी रज़ा है, पथ बिल्कुल सफा है,
फिर पीछे मैं क्यूं हटूंगा !
कुछ अड़चनें, कुछ बाधाऐं आती जाती रहेंगी,
जीवन क्या है, सत्य, झूठ और धर्म सिखाती
रहेंगी,
मेरे संबल, मेरी हिम्मत, मेरे रब का
मान है मुझे रखना
अब तो डटूंगा, अब तो अड़ूंगा, बेशक,
मैं अब ना पीछे हटूंगा !
(मनोज कुमार विट्ठल)
डिगना का अर्थ है—हिलना,
टलना या विचलित होना।
इसका उपयोग किसी वस्तु के अपने स्थान से सरकने या किसी व्यक्ति के अपने निश्चय, वचन या सिद्धांत से पीछे हटने के संदर्भ
में किया जाता है।
संबल का मुख्य अर्थ सहारा, ढांढस (सांत्वना) या बल होता है, जो विशेषकर कठिन परिस्थितियों में किसी को दिया जाता है।

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